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अभी मंदिर जोड़ेंगंडकी चंडी शक्तिपीठ, जिसे मुक्तिनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, नेपाल के गंडकी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक मंदिर है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माने जाने वाला स्थान है, जहाँ देवी सती का दाहिना गाल गिरा था। साथ ही, यह वैष्णवों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के आठ प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है।
शक्ति पीठों का उल्लेख देवी पुराण में मिलता है, जो बताते हैं कि देवी सती के शरीर के अंग या आभूषण जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। गंडकी चंडी शक्तिपीठ में देवी सती ‘गंडकी चंडी’ के रूप में पूजी जाती हैं और भगवान शिव ‘चक्रपाणि’ के रूप में।
यह मंदिर हिंदू आस्था का गहरा प्रतीक है, जहाँ भक्त आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए दूर-दूर से आते हैं।
3800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर एक प्राचीन विष्णु मंदिर है। यह मंदिर श्रीरंगम, तिरुपति, पुष्कर, बद्रीनाथ जैसे अन्य सात प्रमुख विष्णु मंदिरों की श्रृंखला में आता है। यहाँ भगवान विष्णु की पूजा शालिग्राम शिला के रूप में की जाती है, जो गंडकी नदी से प्राप्त होती है।
मान्यता के अनुसार, राक्षस जलंधर की पत्नी वृंदा के साथ छल करने के कारण वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया था कि वे कीट रूप में जन्म लेंगे। यही शालिग्राम शिला है, जिसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है।
मुक्तिनाथ मंदिर पगोडा शैली में बना हुआ है। इसकी सबसे अनूठी बात इसके 108 गौमुख हैं, जिनमें से पानी बहता है और भक्त उसमें स्नान करके पुण्य अर्जित करते हैं। यह जल 108 श्रीवैष्णव दिव्य देशम से जुड़ा हुआ प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
माता सती के आत्मदाह के पश्चात भगवान शिव ने उनका मृत शरीर उठाया और तांडव किया। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभाजित किया और 51 हिस्सों में से एक हिस्सा (दाहिना गाल) गंडकी नदी के तट पर गिरा, जो आज गंडकी चंडी शक्तिपीठ कहलाता है।
नवरात्रि: चैत्र और अश्विन मास में विशेष पूजा व यज्ञ आयोजित किए जाते हैं।
महाशिवरात्रि: भगवान शिव के रूप चक्रपाणि की विशेष पूजा होती है।
बौद्ध उत्सव: बौद्ध धर्मावलंबी भी इस स्थल को पवित्र मानते हैं और यहां उत्सव मनाते हैं।
काठमांडू से पोखरा (206 किमी) – लगभग 6 घंटे की ड्राइव।
पोखरा से जोमसोम – 15–20 मिनट की उड़ान।
जोमसोम से मुक्तिनाथ मंदिर – जीप से 1.5 घंटे की यात्रा और फिर पैदल यात्रा या घोड़े से मंदिर तक।
सुझाव: ऊँचाई के कारण मौसम का विशेष ध्यान रखें। गर्म कपड़े साथ रखें और स्वास्थ्य की जांच पहले करवा लें
मुक्तिनाथ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह मोक्ष की अनुभूति का प्रतीक है। यहाँ आने वाला प्रत्येक भक्त आत्मा की शुद्धता और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है। गंडकी चंडी शक्तिपीठ और मुक्तिनाथ मंदिर दोनों ही श्रद्धा, पौराणिकता और अध्यात्म का संगम हैं।
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