कार्तिकेय मंदिर

Shri Kartik Mandir, Jiwaji gunj, Lashkar

Gwalior, Madhya Pradesh, India

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ग्वालियर का अनोखा कार्तिकेय मंदिर: 400 साल पुरानी भक्ति और परंपरा का प्रतीक

ग्वालियर शहर में स्थित भगवान कार्तिकेय का मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महिमा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अद्वितीय परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर मध्यप्रदेश का इकलौता कार्तिकेय मंदिर है, जहां भगवान के दर्शन केवल साल में एक बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन होते हैं। इस दिन हजारों भक्त दूर-दूर से भगवान कार्तिकेय के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।


मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि

ग्वालियर का कार्तिकेय मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। यह मंदिर जीवाजीगंज में स्थित है, जहां भगवान कार्तिकेय की छह मुखों वाली प्रतिमा विराजमान है। इसके साथ ही मंदिर में गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी मूर्ति, हनुमान जी, लक्ष्मीनारायण जी, और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं।

हालांकि इन देवी-देवताओं के दर्शन भक्त साल भर कर सकते हैं, लेकिन भगवान कार्तिकेय के दर्शन केवल कार्तिक पूर्णिमा के दिन होते हैं।


साल में एक बार खुलते हैं मंदिर के पट

भगवान कार्तिकेय के दर्शन की प्रक्रिया बेहद विशेष है।

  • आधी रात को पट खुलना: कार्तिक पूर्णिमा की आधी रात 12 बजे मंदिर के पट खुलते हैं।
  • विशेष श्रृंगार: भगवान का विशेष श्रृंगार कर उन्हें भक्तों के दर्शन के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
  • सुबह 4 बजे शुरू होता है दर्शन: भक्त सुबह से कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन करते हैं।

यह परंपरा न केवल भक्तों को भगवान की कृपा का अनुभव कराती है, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद भी प्रदान करती है।


भगवान कार्तिकेय की कथा और मान्यता

भगवान कार्तिकेय से जुड़ी एक विशेष कथा इस मंदिर की परंपरा को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
एक बार, भगवान कार्तिकेय शिव और पार्वती से नाराज होकर अज्ञात स्थान पर तपस्या करने चले गए। जब माता-पिता उन्हें मनाने पहुंचे, तो भगवान कार्तिकेय ने नाराजगी में यह शाप दिया:

  • स्त्रियों के लिए: जो स्त्री उनके दर्शन करेगी, वह सात जन्मों तक विधवा होगी।
  • पुरुषों के लिए: जो पुरुष उनके दर्शन करेगा, वह सात जन्मों तक नरक भोगेगा।

जब माता पार्वती ने उनसे भक्तों के कल्याण के लिए इस शाप को वापस लेने की प्रार्थना की, तो भगवान कार्तिकेय ने इसे संशोधित करते हुए कहा:
"कार्तिक पूर्णिमा के दिन जो भक्त मेरे दर्शन करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।"

तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि भगवान कार्तिकेय के दर्शन केवल उनके जन्मदिन (कार्तिक पूर्णिमा) पर ही होते हैं।


गणेश और कार्तिकेय की कथा

मंदिर से जुड़ी एक अन्य कथा गणेश और कार्तिकेय के विवाह से संबंधित है।
एक बार, भगवान शिव और माता पार्वती ने दोनों पुत्रों के विवाह के लिए यह शर्त रखी कि जो सबसे पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लौटेगा, उसका विवाह पहले होगा।

  • कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकल गए।
  • गणेश जी ने अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करते हुए अपने माता-पिता की परिक्रमा की और कहा कि उनके लिए माता-पिता ही ब्रह्मांड हैं।

गणेश जी विजेता घोषित हुए और उनका विवाह संपन्न हो गया। जब यह बात नारद मुनि के माध्यम से कार्तिकेय को पता चली, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। गुस्से में उन्होंने शाप दिया कि जो भी उनके दर्शन करेगा, वह सात जन्मों तक नरक भोगेगा।

माता-पिता के मनाने पर उन्होंने इस शाप में बदलाव किया और वरदान दिया कि जो भक्त कार्तिक पूर्णिमा के दिन उनके दर्शन करेगा, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी।


मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएं

ग्वालियर का यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि वास्तुशिल्पीय दृष्टि से भी अद्वितीय है।

  1. भगवान कार्तिकेय की 6 मुखों वाली प्रतिमा: यह प्रतिमा उनकी शक्ति, ज्ञान और धैर्य का प्रतीक है।
  2. त्रिवेणी मूर्ति: मंदिर में गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी मूर्ति है, जो इसे और भी पवित्र बनाती है।
  3. विशेष श्रृंगार: कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान का ऐसा दिव्य श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

दर्शन का महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था

भगवान कार्तिकेय के दर्शन के लिए हर साल हजारों भक्त देशभर से यहां पहुंचते हैं। यह माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर उनके दर्शन से:

  • सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • पापों से मुक्ति मिलती है।
  • जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।

निष्कर्ष

ग्वालियर का कार्तिकेय मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और भक्ति का प्रतीक है। यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र है, जहां साल भर इंतजार करने के बाद केवल एक दिन भगवान के दर्शन होते हैं।

यह अद्वितीय परंपरा भगवान कार्तिकेय के प्रति भक्तों के समर्पण और श्रद्धा का प्रमाण है। यदि आप भी आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में हैं, तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मंदिर की यात्रा अवश्य करें और भगवान कार्तिकेय के दर्शन का लाभ उठाएं।

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