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अभी मंदिर जोड़ेंत्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ, भारत के 51 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जो जालंधर, पंजाब में स्थित है। यह पवित्र स्थल देवी सती या शक्ति को समर्पित है, जिनकी पूजा हजारों भक्त श्रद्धा भाव से करते हैं। मान्यता है कि यहां देवी सती का बायां वक्ष गिरा था, इसलिए इसे स्तनपीठ के नाम से भी जाना जाता है।
यहां देवी सती को त्रिपुरमालिनी और भगवान शिव को भिषण के नाम से पूजा जाता है। कई ऋषि-मुनियों जैसे वशिष्ठ, व्यास, मनु, जमदग्नि और परशुराम ने यहां आद्या शक्ति की आराधना की है। माना जाता है कि यहां पूजा करने से भक्तों को संतान की प्राप्ति होती है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ के मुख्य मंदिर का प्राचीन ढांचा समय के साथ बदलकर आधुनिक स्वरूप में आ गया है। मंदिर परिसर में एक विशाल तालाब है, जिसे स्थानीय लोग देवी तालाब कहते हैं। इसके अलावा, मंदिर में मां काली का भी एक मंदिर है। हाल ही में, मंदिर परिसर में अमरनाथ गुफा की प्रतिकृति भी बनाई गई है, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ को देवी सती के स्तन गिरने के कारण स्तनपीठ कहा जाता है। मान्यता है कि यहां की मूर्ति में माता वैष्णो देवी, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की शक्तियां भी विद्यमान हैं, जो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस मंदिर में हमेशा एक अखंड दीप जलता रहता है, जो अन्य शक्तिपीठों की तरह यहां की विशेषता है।
ऐसी मान्यता है कि त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ में दुर्घटनावश मृत्यु होने पर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां तक कि पक्षी और जानवर भी यहां मरने पर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। कहा जाता है कि यहां सभी देवी-देवता माता रानी से मिलने के लिए उपस्थित रहते हैं। यहां पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे भक्त मां की सुरक्षा और आशीर्वाद में रहते हैं।
मंदिर का शिखर सोने से बना हुआ है, जो इसकी भव्यता को और अधिक बढ़ाता है। नवरात्रों और विशेष अवसरों पर यहां भव्य मेले और जागरण का आयोजन होता है। इस दौरान मंदिर को सुंदर झांकियों से सजाया जाता है, जिससे यह किसी त्योहार जैसा माहौल बन जाता है।
दर्शन समय:
आरती समय:
भक्तों से पारंपरिक और औपचारिक वस्त्र पहनने का अनुरोध किया जाता है। मंदिर परिसर में शालीन और धार्मिक माहौल बनाए रखने के लिए यह नियम है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ, जालंधर रेलवे स्टेशन से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान हावड़ा-अमृतसर मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है, जिससे यहां पहुंचना आसान है।
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