Log In to continue.
कोटेश्वर महादेव, ग्वालियर
🕉️ पवित्र मंदिर

कोटेश्वर महादेव, ग्वालियर

Koteshwar Mandir Rd, Sector-4, shiv sadan, Gwalior, Madhya Pradesh, India
5.0
1 ratings

Do you have a temple near you?

Help us reach information about religious places in your area to everyone. If there is a temple near you that is not listed here, please add it to the website.

Suggested for you:

आत्मा के साथ साथ, भक्ति और आध्यात्मिकता का आधार शिव मंदिरों में समाहित है। यहाँ तक कि भारत के हर कोने में स्थित मंदिरों में भक्तों के मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है। ग्वालियर किले के पास स्थित शिव मंदिर भी इसी आध्यात्मिक अनुभव का एक अद्वितीय स्थल है। यहाँ की महानता और रहस्यमय संवेदना हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।

ग्वालियर किले पर स्थापित शिवमंदिर में स्थापित शिवलिंग को 17वीं शताब्दी में औरंगजेब ने किले से नीचे फेंक दिया था जो कि लगभग 500 मीटर दूर जाकर गिरा था। किले के नीचे उसी शिवलिंग को कोटेश्वर महादेव के नाम से सिंधिया राजवंश ने संवत 1937-38 में इसे पुनर्स्थापित किया। किले पर बने शिव मंदिर में होने वाले जलाभिषेक से किले पर वाटर हार्वेस्टिंग होती थी।

आज सावन का पहला सोमवार है, आज हम भोले बाबा के भक्तों को कोटेश्वर महादेव के उस प्राचीन मंदिर के दर्शन करवा रहे हैं। जिसे उजाड़ने का आदेश औरंगजेब ने अपने सैनिकों को दिया था। सैनिकों ने बाबा के मंदिर से शिवलिंग को उखाड़ने का प्रयास किया जिसके बाद वहां पर सैकड़ों की संख्या में नाग पहुंच गए और उन्होंने सैनिकों को डंस लिया था। इसके बाद सैनिकों ने किसी तरह मंदिर में स्थापित प्रतिमा को किले से नीचे तलहटी में फेंक दिया। इसके बाद सैनिकों ने अपनी प्यास बुझाने के लिए अभिषेक किए गए जल का आचमन किया, इसके बाद सभी सैनिक मारे गए। शिवलिंग किला तलहटी में 150 साल पड़ा रहा, बाद में सिंधिया राजवंश ने किला तलहटी से कुछ दूरी पर बंजारों के मंदिर के पास कोटेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की।

किले पर स्थित शिव मंदिर में होने वाले जलाभिषेक से किले पर वाटर हार्वेस्टिंग होती थी। इस मंदिर में होने वाला जलाभिषेक शिव मंदिर से नीचे बने एक छोटे से कुंड में एकत्रित होता था। इस कुंड से लगभग 4 इंच मोटे पाइप लाइन से यह पानी बहकर नीचे आता था। जो कि एक बड़े कुंड में एकत्रित होता था। इस कुंड में नीचे तक जाने की किसी को इजाजत नहीं थी। जिसे भी अभिषेक किए गए जल का प्रसाद लेना होता था वह सीढ़ियों पर खड़े होकर जल ग्रहण कर लेता था। यहां से यह जल किले की पहाड़ी में वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए पहुंचता था। वहीं वर्तमान में कोटेश्वर महादेव मंदिर के ठीक पीछे पहले बंजारों का शिव मंदिर और दो बावड़ी थीं। औरगंजेब ने इस मंदिर से शिवलिंग को निकालकर इसी बावड़ी में फेंक दिया था, यह बावड़ी लगभग 12 मंजिला गहरी है। लेकिन वर्तमान में इसके अंदर 30 से 40 फीट पर पानी है। इस बावड़ी में कोटेश्वर महादेव मंदिर में चढ़ाया गया जल एवं बारिश का पानी परिसर में बनी नालियों के जरिए बहकर पहुंचता है।

भक्तों के अनुभव

1 Reviews
User
Rajesh Naruka

— रेटिंग दी

मंदिर गैलरी

View on Google Maps

Read More


Load More
;