भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के महान व्याख्याताओं में आचार्य केशवम अवस्थी जी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे अवस्थी जी ने अपना जीवन वैदिक ज्ञान और सनातन धर्म के प्रसार में समर्पित कर दिया है। आचार्य केशवम अवस्थी जी अपनी पूर्वजों की परंपरा का पालन कर रहे है लगातार 700 वर्षो से चली आ रही आचार्य परंपरा ऋषि परंपरा के हम संवाहक है आचार्य केशवम अवस्थी जी के बाबा के पिता जी पूज्य पण्डित गोविंद जी अवस्थी एवं उनसे पूर्व के सभी पूर्वज आचार्य एवं व्यास परंपरा के पोषक थे आचार्य केशवम अवस्थी जी के बाबा पंडित श्री प्रेमनारायण अवस्थी भी प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं कर्मकांड विशेषज्ञ थे और फिर आचार्य केशवम अवस्थी जी के पिता श्री ने इस परम्परा को विश्व कीर्तिमान पर स्थापित किया और बो आज विश्व के सुप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय कथाकार एवं समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी जी है और उसी परंपरा में जन्म लेकर आचार्य केशवम अवस्थी जी भी इस सनातन यात्रा को बड़ा रहे है
आचार्य केशवम अवस्थी जी का शास्त्रीय शिक्षा में गहरा अध्ययन है। उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में संस्कृत व्याकरण का गहन अध्ययन किया। उनकी विद्वत्ता उन्हें वैदिक परंपरा के एक प्रमुख विद्वान के रूप में स्थापित करती है।
विशेष रूप से, उनकी रुचि अद्वैत वेदांत में रही है - एक दार्शनिक परंपरा जो ब्रह्म और आत्मा की एकता पर बल देती है। अवस्थी जी की व्याख्याओं में, इस जटिल दर्शन को सरल और बोधगम्य तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे आम जन भी इसे समझ सकें।
हालांकि अवस्थी जी वैदिक ज्ञान में पारंगत हैं, लेकिन उनकी शिक्षाओं का केंद्र भक्ति मार्ग है। उनका मानना है कि ज्ञान अकेले पूर्णता तक नहीं ले जा सकता; इसके साथ भगवान के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण भी आवश्यक है।
उनके प्रवचनों में, वे अक्सर भक्ति के महान संतों - मीराबाई, तुलसीदास, सूरदास - का उदाहरण देते हैं। वे बताते हैं कि कैसे इन संतों ने अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनकी भक्ति ने उन्हें शांति और आनंद प्रदान किया।
आचार्य केशवम अवस्थी जी सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान में विश्वास नहीं रखते। उनका जोर इस बात पर है कि धर्म को दैनिक जीवन में उतारा जाना चाहिए। उनके अनुसार, हर कर्म एक पूजा बन सकता है, अगर उसे सही भावना और निष्ठा के साथ किया जाए।
वे अक्सर गीता के इस संदेश को दोहराते हैं: "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" - अर्थात, कर्म करने का अधिकार है, फल की चिंता नहीं। उनका मानना है कि यह सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक विकास के लिए, बल्कि व्यावहारिक सफलता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अवस्थी जी के प्रवचन केवल आध्यात्मिक विषयों तक सीमित नहीं हैं। वे समाज की वर्तमान चुनौतियों पर भी बात करते हैं - चाहे वह पर्यावरण संकट हो, नैतिक मूल्यों का ह्रास हो, या युवा पीढ़ी में बढ़ता तनाव।
उदाहरण के लिए, पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए, वे वसुंधरा की अवधारणा का उल्लेख करते हैं - जहां पृथ्वी को माता के रूप में पूजा जाती है। वे कहते हैं कि अगर हम इस भावना को अपना लें, तो हम स्वाभाविक रूप से प्रकृति का सम्मान करेंगे।
इसी तरह, आधुनिक जीवन में बढ़ते तनाव पर, वे योग और ध्यान की शिक्षा देते हैं। उनका मानना है कि इन प्राचीन तकनीकों में न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की भी क्षमता है।
आचार्य केशवम अवस्थी जी के प्रवचनों की एक विशेषता यह है कि वे सार्वभौमिक हैं। हालांकि वे हिंदू परंपरा से आते हैं, लेकिन उनके संदेश में किसी एक धर्म या संस्कृति की सीमाएं नहीं हैं।
वे अक्सर कहते हैं, "वसुधैव कुटुम्बकम्" - पूरी दुनिया एक परिवार है। उनका मानना है कि सभी धर्मों का मूल संदेश एक ही है - प्रेम, करुणा, और सेवा। इस दृष्टिकोण के कारण, उनके श्रोताओं में केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों और पृष्ठभूमि के लोग भी शामिल हैं।
आचार्य केशवम अवस्थी जी भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के एक प्रमुख प्रतिनिधि हैं। वैदिक ज्ञान में उनकी गहरी समझ, भक्ति के प्रति उनकी निष्ठा, और सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी संवेदनशीलता उन्हें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाती है।
वे पुरातन ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाते हैं, जिससे लोग अपने दैनिक जीवन में इसे अपना सकें। इस प्रकार, वे न केवल हिंदू धर्म को जीवंत रखते हैं, बल्कि उसे एक ऐसा रूप देते हैं जो आज के विश्व में भी प्रासंगिक है।
उनके योगदान ने हजारों लोगों के जीवन को छूआ है, उन्हें आंतरिक शांति और सामाजिक सद्भाव की दिशा में प्रेरित किया है। इस तरह, आचार्य केशवम अवस्थी जी सिर्फ एक धार्मिक गुरु नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तनकारी भी हैं।
महाराज जी के बारे में अधिक जानने के लिए यह वीडियो देखें और इसे अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करें।
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