Bansiwat near Sudama Kuti, Parikrama Marg,
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श्री मलुक पीठ जी सत्य और विश्वास की आत्मा है। उनके वचन और शिक्षाएं भगवान के प्रति सच्ची भावनाओं को समझने में सहायक हैं। श्री राजेंद्र दास जी महाराज, जो मलुक पीठ के पीठाधीश हैं, अपने अलौकिक चिंतन और मनन के माध्यम से हर प्राणी मात्र की सुख-समृद्धि के लिए समर्पित हैं।
महाराज जी प्रखर वक्ता हैं, और उनके मुख से राम कथा सुनना सौभाग्य की बात है। वे सरल और सुंदर भाषा में राम कथा का व्याख्यान करते हैं, जो सुनने वालों के मन में भगवान के प्रति प्रेम और आनंद का संचार करता है। महाराज जी को संस्कृत भाषा और श्रीमद्भगवत पुराण में विशेष ज्ञान है। उनकी वाणी सुनने वालों को जीवन के कष्टों और निराशा से मुक्ति दिलाती है।
महाराज जी का जन्म चित्रकूट के निकट एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके व्याख्यानों में भक्त आनंद का अनुभव करते हैं और दिव्यता का प्रसार होता है।
शास्त्र सेवा
मलूक पीठ में कई वर्षों से गुरुकुल में छात्रों को वैदिक जीवन, संस्कृत भाषा, और शास्त्रीय संगीत सिखाया जा रहा है। गौ सेवा और शिक्षा कार्य यहां के मुख्य सेवा कार्यों में से एक हैं। महाराज जी का उद्देश्य सभी को शिक्षा प्रदान करना और गौ रक्षा करना है।
साधु सेवा
वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर स्थित 'मलूक पीठ गौशाला' साधुओं को गौमाता की सेवा का अवसर प्रदान करता है।
श्री मलूक पीठ का उद्देश्य समाज को गौ सेवा और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से उन्नति की ओर ले जाना है। महाराज जी का अलौकिक चिंतन और भक्तों के प्रति समर्पण सभी को प्रेरणा प्रदान करता है।
श्री मलूक पीठ वर्तमान में वंशीवट मोहल्ला, जमुना पुलीन पर स्थित है। यह स्थान पहले श्री मलूक दास जी अखाड़ा के नाम से जाना जाता था। यहीं पर श्री मलूक दास जी लगभग 2500 संतों के साथ रहते थे। ये संत अपना समय और ऊर्जा ठाकुर/भगवान सेवा, साधु/संत सेवा और भक्ति संगीत एवं भजनों को सीखने में लगाते थे।
श्री मलूक पीठ एक अत्यंत धार्मिक सनातन धर्म संस्था है जिसका नेतृत्व वर्तमान में परम पूज्य मालूक पीठाधीश्वर श्री जगद्गुरु देवाचार्य स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज द्वारा किया जा रहा है। उनके दिव्य नेतृत्व में ठाकुर/भगवान सेवा, साधु/संत सेवा, गुरुकुल (छात्रों के लिए शिक्षा कार्यक्रम), गरीब लोगों, भक्तों और संतों के लिए भोजन एवं चिकित्सा उपचार जैसी धार्मिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही छात्रों और भक्तों के लिए भारतीय पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र जैसे हारमोनियम, तबला आदि सीखने और भजन सीखने की भी व्यवस्था है।
श्री मलूक पीठ मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर चार संप्रदाय आश्रम मार्ग पर मालूक पीठ गौशाला स्थित है। इस गौशाला में बहुत सी भारतीय वैदिक गायें हैं जिनका श्री मालूक पीठ संस्था द्वारा बहुत ही अच्छे से ध्यान रखा जाता है। गौशाला से प्राप्त गायों के दूध से बने दूध और दूध उत्पादों जैसे घी, छाछ, दही आदि का उपयोग ठाकुर/भगवान सेवा के लिए और संतों एवं भक्तों के लिए प्रसाद के रूप में किया जाता है। गौशाला में हरे चारे, दलिया, गुड़ आदि की समुचित व्यवस्था है जिन्हें प्रतिदिन ट्रॉलियों के माध्यम से लाया जाता है। साथ ही किसी भी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही गायों के लिए चिकित्सा उपचार की भी व्यवस्था है।
मलूक पीठाधीश्वर श्री जगद्गुरु स्वामी राजेंद्र दास जी महाराज ने राजस्थान के भरतपुर जिले में श्री ब्रज कामद सुरभि वन एवं शोध संस्थान (जड़खोर गोधाम दाम) की स्थापना की है। श्री महाराज जी ने जड़खोर गोधाम के लिए उसी स्थान को चुना है जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने भाई, बलराम जी और अन्य मित्रों के साथ भारतीय वैदिक गायों (गोचरण) को चराने के लिए जाते थे। साथ ही इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण ने पत्थरों पर यह शपथ ली थी कि वह कभी ब्रज से दूर नहीं जाएंगे। जड़खोर गोधाम में वर्तमान में 9000 से अधिक गायें सुरक्षित और आरामदायक वातावरण में रह रही हैं। इनमें से ज्यादातर गायें बूढ़ी हैं और कसाईयों और बूचड़खाने से बचाई गई हैं। गुरुदेव महाराज अपनी हर कथा में माता गाय की सेवा और रक्षा करने की सलाह देते हैं। साथ ही आगामी योजना गौ-हस्पताल खोलने की है जो विभिन्न बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही गायों का इलाज करेगा।
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