भारत का हर मंदिर अपनी एक अनूठी कहानी और विशेषता लिए होता है, लेकिन चेन्नई में स्थित पार्थसारथी मंदिर एक ऐसा पवित्र स्थल है, जो भगवान श्रीकृष्ण के अद्वितीय और दुर्लभ रूप को प्रदर्शित करता है। यह एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण को मूंछों वाले योद्धा और गीता के उपदेशक के रूप में पूजा जाता है।
यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका इतिहास, स्थापत्य कला और आध्यात्मिक महत्व इसे भारत के अद्भुत मंदिरों में शुमार करता है। आइए, इस मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को विस्तार से समझें।
महाभारत के युद्ध में, जब अर्जुन अपने कर्तव्यों को लेकर दुविधा में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें भगवद गीता का दिव्य ज्ञान दिया। इस ज्ञान ने न केवल अर्जुन को धर्म और कर्म का महत्व समझाया, बल्कि यह विश्व को एक शाश्वत संदेश भी देता है।
चेन्नई का पार्थसारथी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को ‘अर्जुन के सारथी’ (पार्थसारथी) के रूप में समर्पित है। यहां स्थापित मूर्ति में भगवान को उनके युद्धकालीन रूप में मूंछों के साथ दर्शाया गया है। यह स्वरूप उन्हें एक योद्धा, शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
पार्थसारथी मंदिर, तिरुवल्लीकेनी और ब्रिटिश दौर के ट्रिपलिकेन(तिरुवालिकेन्नी ' (Tiruvallikkeni) का मतलब है 'पवित्र तालाब जिसमें कमल खिलते हैं'. ब्रितानी साम्राज्य के दौरान इस जगह का नाम 'ट्रिप्लीकेन' (Triplicane) रख दिया गया) बीच में स्थित है
पार्थसारथी मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में पल्लव वंश के राजाओं द्वारा किया गया था। यह मंदिर बाद में 11वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासकों द्वारा पुनर्निर्मित किया गया।
मंदिर का नाम इसके पास स्थित पवित्र तालाब से लिया गया है, जिसमें पांच पवित्र कुएं हैं। इन कुओं का जल इतना पवित्र माना जाता है कि इसे गंगा नदी के जल से भी अधिक महत्व दिया जाता है।
पार्थसारथी मंदिर का उल्लेख ब्रह्मांड पुराण में मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के पांच प्रमुख देवताओं की पूजा सप्तऋषियों - भृगु, मंछी, अत्रि, मार्कंडेय, सुमति, सप्तरोमा, और जाबालि - द्वारा की गई थी। इसके अलावा, इस मंदिर की महिमा को थिरुमाझिसाई आलवार, पेयालवार, और बाद में थिरुमंगई मन्नन (कालियान) ने अपने भजनों में गाया है।
यह भी मान्यता है कि यह स्थान हजारों वर्षों से तीर्थयात्रियों के लिए एक प्रमुख पड़ाव रहा है, खासकर उन दिनों जब लोग सूर्य और चंद्र ग्रहणों पर समुद्र में स्नान करने आते थे।
मंदिर के मुख्य देवता श्री वेंकटकृष्ण स्वामी को गीता के उपदेशक और महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी के रूप में पूजा जाता है।
ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, राजा सुमती ने सात पहाड़ियों के भगवान श्री तिरुवेंगडा से प्रार्थना की कि वे उन्हें महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के सारथी के रूप में दर्शन दें। भगवान ने उन्हें स्वप्न में आदेश दिया कि वे ब्रिंदारण्य जाएं, जहां उन्हें वह रूप में दर्शन देंगे।
इस दौरान, ऋषि आत्रेय ने अपने गुरु वेदव्यास से तप के लिए उचित स्थान पूछा। वेदव्यास ने उन्हें ब्रिंदारण्य जाने का सुझाव दिया, जहां राजा सुमती तप कर रहे थे। वेदव्यास ने आत्रेय को दिव्य मंगल विग्रह (शंख और ज्ञान मुद्रा के साथ) प्रदान किया और उन्हें वहां जाकर पूजा करने का निर्देश दिया।
मंदिर में मुख्य देवता के रूप में श्री पार्थसारथी स्वामी की पूजा होती है, जिन्हें "गीता का सारथी" भी कहा जाता है। उनके साथ उनकी पत्नी श्री रुक्मिणी थायर, उनके छोटे भाई सत्यकि, बड़े भाई बलराम, उनके पुत्र प्रद्युम्न, और उनके पौत्र अनिरुद्ध की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
यह सभी मूर्तियां इस प्रकार स्थापित हैं कि वे भगवान कृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण घटनाओं और संबंधों को दर्शाती हैं।
पार्थसारथी मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और अद्वितीय गोपुरम (प्रवेश द्वार) के लिए जाना जाता है।
यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और उनके विभिन्न रूपों के महत्व को समझाने का अद्भुत स्थान है।
मंदिर के पास स्थित पवित्र तालाब को ‘तिरुवल्लीकेनी तालाब’ के नाम से जाना जाता है। यहां के पांच कुओं का जल बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
मंदिर का पवित्र सरोवर और आध्यात्मिक महिमा
मंदिर के पास स्थित कैरवणी तीर्थम (सरोवर) में तुलसी के पौधों से आच्छादित क्षेत्र है, जिसे अति पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
यह मंदिर धार्मिकता के साथ-साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है। चेन्नई के तिरुवल्लीकेनी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
पार्थसारथी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है भगवान श्रीकृष्ण की मूंछों वाली प्रतिमा। यह उनके योद्धा और शिक्षक स्वरूप को दर्शाती है, जो धर्म की रक्षा के लिए हर परिस्थिति का सामना करने को तैयार रहते हैं।
पार्थसारथी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, यह भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के कई पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता है। यहां उनके गीता उपदेशक स्वरूप और मूंछों वाले योद्धा रूप की पूजा भारतीय धर्म और संस्कृति में उनकी व्यापक भूमिका को रेखांकित करती है।
यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श स्थान है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को गहराई से समझना चाहते हैं और भारतीय वास्तुकला की भव्यता का अनुभव करना चाहते हैं।
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