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अभी मंदिर जोड़ेंमध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित माता लखेश्वरी का दरबार एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जिसकी पहचान वर्षों से “डकैतों की देवी” के रूप में भी रही है। यह मंदिर जिला मुख्यालय ग्वालियर से लगभग 70 किलोमीटर दूर भितरवार क्षेत्र में स्थित है। घने जंगलों के बीच एक पहाड़ी पर स्थापित यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने स्थान और परिवेश के कारण विशेष महत्व रखता है।
माता लखेश्वरी का मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसकी ऊँचाई लगभग 460 फीट मानी जाती है। चारों ओर फैला जंगल और ऊँचाई पर स्थित मंदिर इसे एक अलग ही पहचान देता है। यहाँ पहुँचते ही वातावरण में शांति और एक अलग प्रकार की ऊर्जा का अनुभव होता है, जिसके कारण श्रद्धालु इसे केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि साधना और विश्वास का केंद्र मानते हैं।
चंबल अंचल का यह क्षेत्र कभी डकैतों की गतिविधियों के लिए जाना जाता था। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, पुराने समय में इस इलाके में सक्रिय डकैत माता लखेश्वरी को अपनी आराध्य देवी मानते थे। किसी भी बड़े कार्य से पहले वे माता के दरबार में हाजिरी लगाते और मनौती मांगते थे। इसी कारण माता लखेश्वरी को “डकैतों की देवी” के नाम से भी जाना जाने लगा। यह पहचान पूरी तरह लोक-मान्यता और क्षेत्रीय इतिहास से जुड़ी है।
माता लखेश्वरी का दरबार लखिया वन क्षेत्र में स्थित है। पहले यहाँ तक पहुँचना आसान नहीं था, लेकिन समय के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएँ की गईं। आज मंदिर तक पहुँचने के लिए पहाड़ी पर चढ़ाई का मार्ग उपलब्ध है, जहाँ पैदल और वाहन दोनों माध्यमों से पहुँचा जा सकता है। ऊँचाई पर पहुँचने के बाद आसपास का दृश्य और जंगलों का विस्तार श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभव देता है।
नवरात्रि के समय माता लखेश्वरी का दरबार विशेष रूप से जीवंत हो जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। कई श्रद्धालु माता से मनोकामना पूर्ति, पारिवारिक सुख और जीवन में स्थिरता की कामना करते हैं।
माता लखेश्वरी के मंदिर का इतिहास लिखित दस्तावेजों की बजाय स्थानीय परंपराओं और मौखिक कथाओं में अधिक मिलता है। कहा जाता है कि यह मंदिर बहुत प्राचीन है और समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार होता रहा है। आज भी यह स्थल भितरवार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की धार्मिक पहचान बना हुआ है।
वर्तमान समय में माता लखेश्वरी का दरबार केवल अतीत की कथाओं तक सीमित नहीं है। यह मंदिर आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। जंगलों के बीच पहाड़ी पर स्थित यह स्थल आस्था और प्रकृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। यहाँ आने वाले लोग इसे एक शक्तिपूर्ण स्थान मानते हैं, जहाँ श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई प्रार्थना विशेष महत्व रखती है।
भितरवार क्षेत्र में स्थित माता लखेश्वरी का दरबार ग्वालियर जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 460 फीट ऊँची पहाड़ी पर जंगलों के बीच बसा यह मंदिर आस्था, लोक-मान्यता और क्षेत्रीय इतिहास को एक साथ समेटे हुए है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ उमड़ने वाली भीड़ यह दर्शाती है कि माता लखेश्वरी आज भी लोगों के विश्वास और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं।
ग्वालियर → भितरवार: सड़क मार्ग से
भितरवार से आगे लखिया वन क्षेत्र की ओर मार्ग
पहाड़ी तक पहुँचने के लिए
पैदल मार्ग
और वाहन योग्य सड़क (कुछ हिस्सों में)
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