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श्रीनाथ जी मंदिर- गोवर्धन

Shri Nathji na Mandir, On Shri Giriraj Parvat. Post G.B. (jatipura) 281001, Dist., Jatipura,
Govardhan, Uttar Pradesh, India

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श्रीनाथ जी मंदिर जतीपुरा – ब्रजभूमि में अजब प्रेम की अमर गाथा

भूमिका

ब्रजभूमि का कण-कण राधा-कृष्ण की लीलाओं का साक्षी है। यहां का प्रत्येक मंदिर प्रेम, भक्ति और समर्पण की जीवंत परिभाषा है। राधा के निष्कलंक प्रेम की सुगंध से सराबोर ब्रजधरा पर स्थित जतीपुरा का श्रीनाथ जी मंदिर अजब कुमारी और श्रीकृष्ण के अलौकिक प्रेम की अनकही गाथा सुनाता है। यह मंदिर केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के मिलन की अमर कथा है।

गिरिराज शिलाओं के ऊपर से प्रभु तक का मार्ग

जतीपुरा स्थित श्रीनाथ जी मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को गिरिराज गोवर्धन की शिलाओं के ऊपर से होकर गुजरना पड़ता है। यह मार्ग स्वयं साधना का अनुभव कराता है। मान्यता है कि इसी पथ पर चलते हुए भक्त अपने अहंकार को त्यागकर प्रभु के शरणागत होते हैं।

प्रेम गुफा – भक्त और भगवान के मिलन का रहस्यमय द्वार

मंदिर के भीतर प्रभु के शयन कक्ष से जुड़ा है एक रहस्यमय द्वार—प्रेम गुफा। लोकमान्यता के अनुसार, यह गुफा लगभग 700 किलोमीटर लंबी है और गोवर्धन (उत्तर प्रदेश) से नाथद्वारा (राजस्थान) तक जाती है।
कहा जाता है कि यह गुफा केवल भौगोलिक मार्ग नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है, जहां भक्त की भावना भगवान को भी बांध लेती है।

दास्तान प्रेम की – अजब कुमारी और श्याम सुंदर

मेवाड़ की राजकुमारी अजब कुमारी, तिरछे नयन और मोहक मुस्कान वाले सांवरे श्याम पर ऐसी रीझीं कि उनका हृदय कृष्णमय हो गया। पिता की बीमारी से व्याकुल होकर वह मन्नत लेकर गोवर्धन आईं।
श्रीनाथ जी की बांकी छवि निहारकर, मीरा की भांति उन्होंने मन ही मन ठाकुर को अपना पति स्वीकार कर लिया और गोवर्धन की तलहटी में रहकर प्रभु सेवा करने लगीं।

भक्त की निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तवत्सल भगवान ने उन्हें दर्शन दिए। अजब कुमारी ने प्रभु से नाथद्वारा चलकर अपने पिता को दर्शन देने की प्रार्थना की। ब्रजवासियों के प्रेम में बंधे भगवान ने ब्रज छोड़ने से मना कर दिया।

पर भक्त के प्रेम के वशीभूत होकर प्रभु ने एक अद्भुत शर्त स्वीकार की—

“मैं मंगला नाथद्वारा में करूंगा, पर शयन जतीपुरा में ही करूंगा।”

आज भी जीवित है यह मान्यता

मान्यता है कि श्रीनाथ जी प्रतिदिन प्रेम गुफा के मार्ग से प्रातः नाथद्वारा जाते हैं और शयन के समय पुनः गोवर्धन लौट आते हैं। यह विश्वास आज भी जतीपुरा और नाथद्वारा के भक्तों के हृदय में उतना ही जीवंत है, जितना सदियों पहले था।

श्रीनाथ जी मंदिर जतीपुरा का आध्यात्मिक महत्व

  • अजब कुमारी के निष्काम प्रेम और समर्पण की अमर कथा
  • भक्त और भगवान के पारस्परिक प्रेम का अनुपम उदाहरण
  • गिरिराज गोवर्धन की गोद में स्थित दिव्य स्थल
  • ब्रज परिक्रमा करने वाले भक्तों का प्रमुख पड़ाव

दर्शन का सर्वोत्तम समय

  • गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट
  • कार्तिक मास
  • शरद ऋतु (अक्टूबर–मार्च)

इन दिनों यहां भक्ति, भाव और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

जतीपुरा का श्रीनाथ जी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रेम की वह कथा है जिसने भगवान को भी नियम बदलने पर विवश कर दिया। अजब कुमारी का विश्वास, समर्पण और प्रेम आज भी प्रेम गुफा की शांति में स्पंदित होता है। ब्रज यात्रा अधूरी है, यदि जतीपुरा के श्रीनाथ जी के दर्शन न किए जाएं।

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