भारत के पवित्र शक्तिपीठों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाम है – रत्नावली शक्तिपीठ। यह वही स्थल है जहाँ माता सती का दाहिना कंधा गिरा था, और तभी से यह स्थान देवी शक्ति की आराधना का एक प्रमुख केंद्र बन गया।
रत्नावली शक्तिपीठ, जिसे कुमारी शक्तिपीठ और आनंदमयी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के खानाकुल-कृष्णानगर क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर रत्नाकर नदी के तट पर बसा है, जो इसे एक दिव्य और शांत वातावरण प्रदान करता है।
पुराणों के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपमानित होकर आत्मदाह कर लिया, तो भगवान शिव शोकविह्वल होकर उनके मृत शरीर को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे। उस समय जहां-जहां माँ के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ।
रत्नावली शक्तिपीठ वह स्थान है जहाँ माँ सती का दाहिना कंधा गिरा था। यहाँ माँ के 'कुमारी रूप' की पूजा होती है, जबकि भगवान शिव को 'भैरव' रूप में पूजा जाता है।
हालाँकि रत्नावली शक्तिपीठ में साल भर त्यौहारों की रौनक रहती है, लेकिन नवरात्रि और दुर्गा पूजा का विशेष महत्त्व है। इन अवसरों पर:
भक्तगण उपवास रखते हैं।
मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है।
फूलों, दीपों और विद्युत सजावट से मंदिर का रूप अत्यंत भव्य हो जाता है।
हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन हेतु यहाँ आते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाते हैं।
रत्नावली शक्तिपीठ की यात्रा सरल और सुगम है।
✈️ हवाई मार्ग:
निकटतम हवाई अड्डा नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता में स्थित है।
🚆 रेल मार्ग:
हावड़ा जंक्शन रेलवे स्टेशन से आप टैक्सी या लोकल साधनों के माध्यम से मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
🛣️ सड़क मार्ग:
हुगली जिले की सड़क कनेक्टिविटी उत्तम है, जिससे निजी वाहन या बस से यात्रा सुविधाजनक रहती है।
यह शक्तिपीठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आत्मशुद्धि और ऊर्जा का स्रोत है। यहाँ की शांति, नदी का किनारा, और माँ कुमारी की उपस्थिति हर श्रद्धालु को एक गहरे भावात्मक स्तर पर स्पर्श करती है।
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