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रणछोड़ धाम मंदिर: ललितपुर

रणछोड़ धाम मंदिर धोर्रा क्षेत्र, थाना जाखलौन,
Lalitpur, Uttar Pradesh, India

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ललितपुर के पावन जंगलों में छिपा 5000 वर्ष पुराना रणछोड़ धाम का रहस्य

सकारात्मकता, विवेक और धर्मबोध—ये तीनों जब एक साथ प्रकट होते हैं, तब इतिहास के प्रत्येक प्रसंग में जीवन का गहन संदेश छिपा होता है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि हर समस्या का समाधान केवल युद्ध नहीं, बल्कि धर्मसम्मत कर्म, धैर्य और बुद्धि से भी संभव है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर में, बेतवा नदी (प्राचीन वेत्रवती) के तट पर स्थित रणछोड़ धाम मंदिर इसी दिव्य सत्य का साक्षी है।


🌿 रणछोड़ धाम और मुचकुंद गुफाएं: पौराणिक वैभव

ललितपुर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर, जाखलौन क्षेत्र के धोर्रा के घने जंगलों के बीच रणछोड़ धाम मंदिर और समीप स्थित मुचकुंद गुफाएं विराजमान हैं। मान्यता है कि देवराज इंद्र सहित देवताओं ने यहाँ निवास किया। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध (अध्याय 50, 51 और 52) में इस क्षेत्र और प्रसंग का उल्लेख मिलता है।
यहाँ स्थापित लगभग 5000 वर्ष प्राचीन मंदिर में भगवान रणछोड़ (श्रीकृष्ण) की दिव्य मूर्ति श्रद्धालुओं को दर्शन देती है। हर वर्ष बेतवा नदी के तट पर भव्य मेला लगता है और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बाल स्वरूप की विशेष पूजा होती है।


🕉️ रणभूमि नहीं, धर्म की विजय

मगधराज जरासंध द्वारा युद्ध की चुनौती और कालयवन के साथ उसका गठबंधन—यह प्रसंग धर्म और अधर्म के संघर्ष का प्रतीक है। कालयवन को भगवान शंकर से ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसे युद्ध में पराजित करना असंभव था। इस सत्य को जानते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने सीधे युद्ध के स्थान पर धर्मपूर्ण योजना को चुना।
कालयवन श्रीकृष्ण का पीछा करता हुआ बेतवा नदी के किनारे स्थित गुफा तक पहुँचा, जहाँ त्रेतायुग के प्रतापी राजा मुचकुंद ऋषि-रूप में निद्रा में थे।


🔱 राजा मुचकुंद का वरदान और अधर्म का अंत

देवराज इंद्र के वरदान से राजा मुचकुंद को यह शक्ति मिली थी कि जो उन्हें नींद से जगाएगा, वह भस्म हो जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पीतांबर को राजा मुचकुंद पर डाल दिया और स्वयं छिप गए। कालयवन ने उन्हें कृष्ण समझकर जगाया—और जागते ही राजा मुचकुंद के वरदान से कालयवन जलकर खाक हो गया।
इस प्रकार बिना प्रत्यक्ष युद्ध के अधर्म का अंत हुआ और धर्म की प्रतिष्ठा बनी रही।


🌸 आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

  • रणछोड़ धाम विवेक, धैर्य और धर्म का जीवंत उदाहरण है।

  • यह स्थल सिखाता है कि रणनीति और करुणा भी धर्मयुद्ध के अंग हैं।

  • विंध्य की पहाड़ियाँ, गुफाएं और बेतवा नदी मिलकर यहाँ दिव्य वातावरण रचती हैं।


🚗 कैसे पहुँचें (How to Reach रणछोड़ धाम, ललितपुर)

🚆 रेल मार्ग

  • निकटतम स्टेशन: ललितपुर जंक्शन

  • दूरी: लगभग 50 किमी | टैक्सी/लोकल वाहन उपलब्ध

🛣️ सड़क मार्ग

  • ललितपुर से जाखलौन–धोर्रा मार्ग

  • झांसी, सागर (म.प्र.) से नियमित बस/टैक्सी सुविधा

✈️ हवाई मार्ग

  • निकटतम हवाई अड्डा: झांसी (वैकल्पिक: ग्वालियर)

  • वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा ललितपुर


ललितपुर का रणछोड़ धाम यह स्मरण कराता है कि धर्म की रक्षा में विवेक और धैर्य सर्वोपरि होते हैं। यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला का साक्षी है, जहाँ बिना युद्ध के भी धर्म की विजय संभव होती है।
इस पावन धाम के दर्शन करिए और कर्म, धर्म व बुद्धि के इस अमर संदेश को अपने जीवन में उतारिए। 🙏

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