नवरात्रि का पर्व आते ही मन में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन की इच्छा जागृत हो जाती है। ग्वालियर, मध्यप्रदेश, ऐसे ही कई प्रसिद्ध मंदिरों का घर है, जिनमें से तीन माता रानी के धाम नवरात्रि के दौरान विशेष महत्व रखते हैं।
शीतला माता मंदिर: ग्वालियर के घने जंगलों में स्थित शीतला माता मंदिर। यह एक प्राचीन स्थल है, जहाँ माता शीतला देवी अपनी कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर पहले बहुत सारे शेर रहते थे, लेकिन माता की दिव्य ऊर्जा ने वातावरण को शांत कर दिया। यहाँ के प्रसिद्ध भक्त गजाधर ने माता की नियमित पूजा की, जिसके बाद माता ने उन्हें मंदिर बनाने का निर्देश दिया। आज, नवरात्रि के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु माता शीतला के दर्शन के लिए आते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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मांढरेवाली माता का मंदिर: ग्वालियर में स्थित मांढरेवाली माता का मंदिर। 135 वर्ष पूर्व सिंधिया रियासत के जयाजीराव सिंधिया द्वारा स्थापित, यह मंदिर मां दुर्गा के मांढरेवाली स्वरूप को समर्पित है। यहाँ विराजमान अष्टभुजा वाली महिषासुर मर्दिनी मूर्ति अत्यंत दिव्य है। मांढरेवाली माता सिंधिया परिवार की कुलदेवी भी हैं। माता अपने भक्तों पर विशेष कृपा करती हैं और चैत्र और क्वार नवरात्रि में तो मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दशहरे के पर्व पर सिंधिया राजवंश यहाँ शमी का पूजन भी करता है।
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वैष्णो देवी मंदिर: ग्वालियर के साखिया विलास की पहाड़ी पर स्थित वैष्णो देवी मंदिर। यह मंदिर माता वैष्णो देवी के दर्शन का अनुभव जम्मू जाने के बिना ही ग्वालियर में प्रदान करता है। लगभग 50 साल पहले स्वामी बदरू राम शर्मा ने माता वैष्णो देवी के सपने में दर्शन के बाद इस मंदिर का निर्माण किया था। जम्मू के मंदिर की तरह ही, यहाँ भी गुफा के रास्ते से माता के दर्शन होते हैं। गुफा के वातावरण और ठंडक का अहसास भक्तों को माता के करीब होने का अनुभव कराता है। मंदिर से बाहर निकलने के लिए भी एक अलग गुफा है, जिसमें भगवान शिव का मंदिर भी स्थित है। नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष आयोजन होते हैं।
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