श्री कार्तिकेय जी की आरती : Listening to and performing aarti infuses life with positive energy, peace, and devotion. Read the aartis of all gods and goddesses on Dikshasthal and illuminate your mind with divine light.
जय कार्तिकेय स्वामी, जय कार्तिकेय स्वामी,
जय षण्मुख देवा, जय षण्मुख देवा।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
तुम शिव शंकर के सुत हो, पार्वती के दुलारे,
देवों के सेनापति, संकट हरन हमारे।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
मोर वाहन शोभित, हाथ शक्ति धारी,
छः मुख तेजोमय, रूप अति न्यारी।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
तारकासुर संहारी, दुष्ट दलन कर्ता,
भक्तों के हितकारी, दुख हरण करता।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
ज्ञान और वीरता के, तुम हो भंडारी,
भक्ति भाव से जो ध्यावे, पावे कृपा तुम्हारी।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
बाल रूप मनोहर, करुणा के सागर,
शरण पड़े जो तेरी, कटे उसके सागर।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
जय कार्तिकेय स्वामी, जय कार्तिकेय स्वामी,
जय षण्मुख देवा, जय षण्मुख देवा।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
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