Log In to continue.
yoga practitioner krishan garg

yoga practitioner krishan garg

Devotee
Mind, Body & Soul in Progress ✨🌿🕉️
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
गीता(2/62)

अर्थ: विषय-वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है। इसलिए कोशिश करें कि विषयाशक्ति से दूर रहते हुए कर्म में लीन रहा जाए।


yoga practitioner krishan garg
Liked by Anjali and 2 others
Logo
Logo
Liked by Priya
Show More

© 2026 Dikshasthal. All Rights Reserved.