प्रेमानंद महाराज जी ने जो कहा, वो आज के समाज की सच्चाई है – कड़वी जरूर है, लेकिन आंखें खोलने वाली।
🙏 महाराज जी कहते हैं:
जो लड़कियाँ विवाह से पहले चार-चार बॉयफ्रेंड रखती हैं, और जो पुरुष चार-चार युवतियों के साथ संबंध बनाते हैं — वे विवाह के बाद जीवन को सही दिशा नहीं दे सकते।
यह कोई आलोचना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है।
जब मन बार-बार रिश्तों में उलझता है, तो उसका भावनात्मक संतुलन, विश्वास, और समर्पण की शक्ति कमज़ोर हो जाती है।
विवाह केवल साथ रहने का अनुबंध नहीं, बल्कि एक संघर्षों में साथ निभाने का संकल्प होता है।
और वो संकल्प वही निभा सकता है जिसने पहले से अपने मन और चरित्र को संयमित रखा हो।
चार-चार संबंधों के बाद जब विवाह होता है, तो उसमें न तो वो पवित्रता बचती है, न गहराई, और न ही समर्पण की भावना।
महाराज जी हमें सिर्फ़ ये याद दिला रहे हैं कि
"संस्कार ही स्थायित्व लाते हैं, और मर्यादा ही गृहस्थ जीवन को सफल बनाती है।"
🙏 संतों की वाणी कभी अपमान के लिए नहीं होती — वो तो आईना होती है उस समाज का, जो दिखाना नहीं चाहता कि वो अंदर से टूट रहा है।
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राधे राधे
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