बरसाने की गलियों में आज बड़ा ही सुंदर नज़ारा था।
नन्हे कान्हा अपने छोटे-छोटे कदमों से दौड़ते हुए राधा रानी के पास पहुंचे।
हाथ में माखन का लड्डू और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान थी। 😊
राधा रानी बोलीं —
“कान्हा, फिर से माखन चुराकर आए हो क्या?”
कृष्णा हंसते हुए बोले —
“राधे, तुम्हारे बिना माखन भी फीका लगता है।” 💫
फिर दोनों यमुना किनारे खेलने लगे,
कभी बंसी बजती, कभी राधा रानी मुस्कुरातीं,
और पूरा वृंदावन “राधे-राधे” के नाम से गूंज उठता। 🌸
नन्हे लड्डू गोपाल की शरारत और राधा रानी का प्रेम देखकर
सब भक्तों का मन खुशी से भर गया। ❤️
Ending
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Radhe Radhe
Radhe Radhe ❤️
श्री राधे राधे