कथा ने हमारी सहायता तो क्या ही की, उल्टा हमें अवसाद से ग्रसित कर दिया। स्कन्द पुराण में एक स्थान पर शिवजी कहते हैं कि वे थोड़ी-सी पूजा या तपस्या से सुलभ नहीं हैं। बस इसी बात को पढ़कर हम हताश हो गए हैं। थोड़ी-सी पूजा से भगवान नहीं मिलेंगे और अधिक पूजा हमसे नहीं होगी। अर्थात यह जन्म तो व्यर्थ हो गया!
शिव नाम ही पर्याप्त है....मन पूर्ण समर्पण हो सब सम्भव है
Aisa nahi hai
आप विश्वास बनाए रखे। भगवान दयालु और अपने भक्तों पर जल्द प्रसन्न हो जाते है
मैंने पढ़ी तो नहीं है परंतु भगवान शिव ही भक्तों से जल्द प्रसन्न होने वाले भगवान है। आप कुबेर की कथा पढ़ सकते हैं।जिसमें भगवान शिव ने कैसे एक चोर को कुबेर का पद दे दिया था।