कथा ने हमारी सहायता तो क्या ही की, उल्टा हमें अवसाद से ग्रसित कर दिया। स्कन्द पुराण में एक स्थान पर शिवजी कहते हैं कि वे थोड़ी-सी पूजा या तपस्या से सुलभ नहीं हैं। बस इसी बात को पढ़कर हम हताश हो गए हैं। थोड़ी-सी पूजा से भगवान नहीं मिलेंगे और अधिक पूजा हमसे नहीं होगी। अर्थात यह जन्म तो व्यर्थ हो गया!