रावल गाँव: राधा रानी की जन्मस्थली
राधा रानी, जो भगवान कृष्ण के ह्रदय में वास करती हैं, उनका जन्म यमुना नदी के किनारे बसे रावल गाँव में हुआ था। यह स्थान बरसाना से लगभग 50 किलोमीटर दूर है, जहाँ राधा रानी पली-बढ़ी थीं।
राधा रानी का जन्म:
मान्यता है कि रावल गाँव में ही राधा रानी का जन्म हुआ था। यहाँ स्थापित राधा रानी मंदिर के गर्भगृह में वही स्थान है जहाँ राधा रानी कमल के फूल में प्रकट हुई थीं।
राधा और कृष्ण पेड़ स्वरूप में:
राधा रानी मंदिर के सामने एक प्राचीन बगीचा है, जहाँ दो पेड़ हैं - एक श्वेत और दूसरा श्याम रंग का। कहा जाता है कि ये पेड़ राधा और कृष्ण का स्वरूप हैं।
11 महीने बाद खुले राधा रानी के नेत्र:
शास्त्रों के अनुसार, राधा रानी के नेत्र जन्म से लेकर 11 महीने तक बंद रहे। जब वे 11 महीने की थीं, तब उन्हें गोकुल में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव में ले जाया गया। वहाँ बैठते ही राधा रानी घुटने के बल चलते हुए बालकृष्ण के पास पहुंची और तभी उन्होंने अपने नेत्र खोल दिए।
रावल गाँव में दर्शनीय स्थल:
राधा रानी मंदिर: यह मंदिर राधा रानी के जन्मस्थान पर बना हुआ है। मंदिर में राधा रानी की बालरूप की मूर्ति स्थापित है।
राधा-कृष्ण पेड़: मंदिर के सामने बगीचे में स्थित ये दो पेड़ राधा और कृष्ण का स्वरूप माने जाते हैं।
यमुना नदी: रावल गाँव यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। यहाँ आप यमुना नदी में स्नान कर सकते हैं और नाव की सवारी भी कर सकते हैं।
रावल गाँव कैसे पहुंचें:
सड़क मार्ग: रावल गाँव मथुरा और आगरा से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
रेल मार्ग:रावल गाँव का निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है।
वायु मार्ग: रावल गाँव का निकटतम हवाई अड्डा आगरा का खेरिया हवाई अड्डा है।
रावल गाँव में ठहरने की व्यवस्था:
रावल गाँव में ठहरने के लिए कई धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं।
रावल गाँव जाने का सबसे अच्छा समय:
रावल गाँव जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है।
रावल गाँव में दर्शन का समय:
रानी मंदिर सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
रावल गाँव: एक पवित्र तीर्थस्थल है जहाँ आप राधा रानी के जन्मस्थान के दर्शन कर सकते हैं और उनके जीवन से जुड़ी कहानियों को सुन सकते हैं।
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